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Samagra Dalit Kahaniyan (समग्र दलित कहानियां) Munshi Premchand book in Hindi -0
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Samagra Dalit Kahaniyan (समग्र दलित कहानियां) Munshi Premchand book in Hindi-0

Samagra Dalit Kahaniyan (समग्र दलित कहानियां) Munshi Premchand book in Hindi-In Paperback

Original price was: ₹450.00.Current price is: ₹449.00.

किताब के बारे में

समग्र दलित कहानियां -: मुंशी प्रेमचंद (धनपत राय श्रीवास्तव) को भारतीय साहित्य में ‘कथा सम्राट’ के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने अपनी लेखनी का उपयोग सामाजिक क्रांति और यथार्थवाद के लिए किया। ‘प्रेमचंद की समग्र दलित कहानियाँ’ का संकलन उनके व्यापक सामाजिक सरोकार का प्रमाण है, जो उस समाज की मार्मिक गाथा प्रस्तुत करता है जिसे जातिगत भेदभाव और आर्थिक शोषण ने सदियों से दबा रखा था।इन कहानियों में प्रेमचंद ने दलित समुदायों के जीवन की कटु सच्चाइयों को बेबाकी से चित्रित किया है। वे न केवल उनकी गरीबी, भुखमरी और जातिगत अपमान को दर्शाते हैं, बल्कि सामंती व्यवस्था, जमींदारी प्रथा और धार्मिक पाखंड के कारण उनके साथ हुए अन्याय को भी उजागर करते हैं। ‘सदगति’, ‘कफन’ और ‘ठाकुर का कुआँ’ जैसी उनकी कालजयी रचनाएँ स्पष्ट रूप से दिखाती हैं कि कैसे सामाजिक संरचना ने मनुष्य की मूलभूत गरिमा और स्वतंत्रता को छीन लिया।प्रेमचंद की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे इन पात्रों को केवल पीड़ित के रूप में नहीं दिखाते, बल्कि उनके भीतर छिपी मानवीय जिजीविषा, असंतोष और कभी-कभी प्रतिरोध की भावना को भी सामने लाते हैं। यह संकलन पाठक को झकझोरता है और समाज के ‘निम्नतम’ कहे जाने वाले वर्ग के प्रति संवेदना, आत्म-निरीक्षण और गहरे सामाजिक बदलाव की माँग करता है। यह प्रेमचंद की सामाजिक चेतना और भारतीय यथार्थवाद को समझने के लिए एक अनिवार्य साहित्यिक दस्तावेज है।

लेखक के बारे में

धनपत राय श्रीवास्तव (31 जुलाई 1880 – 8 अक्टूबर 1936) जो प्रेमचंद नाम से जाने जाते हैं, वो हिन्दी और उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार एवं विचारक थे। उन्होंने सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान आदि लगभग डेढ़ दर्जन उपन्यास तथा कफन, पूस की रात, पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, बूढ़ी काकी, दो बैलों की कथा आदि तीन सौ से अधिक कहानियाँ लिखीं। उनमें से अधिकांश हिन्दी तथा उर्दू दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुईं। उन्होंने अपने दौर की सभी प्रमुख उर्दू और हिन्दी पत्रिकाओं जमाना, सरस्वती, माधुरी, मर्यादा, चाँद, सुधा आदि में लिखा। उन्होंने हिन्दी समाचार पत्र जागरण तथा साहित्यिक पत्रिका हंस का संपादन और प्रकाशन भी किया। इसके लिए उन्होंने सरस्वती प्रेस खरीदा जो बाद में घाटे में रहा और बन्द करना पड़ा। प्रेमचंद फिल्मों की पटकथा लिखने मुंबई आए और लगभग तीन वर्ष तक रहे। जीवन के अंतिम दिनों तक वे साहित्य सृजन में लगे रहे। महाजनी सभ्यता उनका अंतिम निबन्ध, साहित्य का उद्देश्य अन्तिम व्याख्यान, कफन अन्तिम कहानी, गोदान अन्तिम पूर्ण उपन्यास तथा मंगलसूत्र अन्तिम अपूर्ण उपन्यास माना जाता है।

‘प्रेमचंद की समग्र दलित कहानियाँ’ किस विषय पर आधारित हैं?

यह संकलन दलित समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और मानवीय संघर्षों को यथार्थवादी दृष्टि से प्रस्तुत करता है।

मुंशी प्रेमचंद को ‘कथा सम्राट’ क्यों कहा जाता है?

क्योंकि उन्होंने कथा साहित्य को सामाजिक यथार्थ, संवेदना और सुधार की चेतना से समृद्ध किया।

इस संग्रह में किन सामाजिक समस्याओं को उजागर किया गया है?

जातिगत भेदभाव, आर्थिक शोषण, सामंती व्यवस्था, जमींदारी प्रथा और धार्मिक पाखंड।

यह संग्रह किस प्रकार सामाजिक बदलाव की मांग करता है?

दलित जीवन की सच्चाइयों को सामने रखकर समानता, न्याय और मानवीय गरिमा की आवश्यकता पर बल देता है।

प्रेमचंद की दलित कहानियाँ क्यों ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं?

क्योंकि उन्होंने संगठित दलित आंदोलन से पहले ही वंचित वर्ग की पीड़ा को साहित्य में स्थान दिया।

Additional information

Weight 450 g
Dimensions 21.59 × 13.97 × 2.9 cm
Author

Munshi Premchand

Format

Paperback

Language

Hindi

Pages

464

Publisher

Diamond Books

Additional information

Weight 450 g
Dimensions 21.59 × 13.97 × 2.9 cm
Author

Munshi Premchand

Format

Paperback

Language

Hindi

Pages

464

Publisher

Diamond Books

Original price was: ₹450.00.Current price is: ₹449.00.

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ISBN10-: 9374764725

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