मानसरोवर भाग 8

75.00

In stock

Free shipping On all orders above Rs 600/-

  • We are available 10/5
  • Need help? contact us, Call us on: +91-9716244500
Guaranteed Safe Checkout

प्रेमचंद ने हिंदी कहानी को एक निश्चित परिप्रेक्ष्‍य और कलात्‍मक आधार दिया। उन्‍होंने कहानी के स्‍वरूप को पाठकों की रुचि, कल्‍पना और विचार शक्ति का निर्माण करते हुए विकसित किया है। उनकी कहानियों का भाव-जगत् आत्‍मानुभूत अथवा निकट से देखा हुआ है। कहानी-क्षेत्र में वे वास्‍तविक जगत की उपज थे। उनकी कहानी की विशिष्‍टता यह है कि उसमें आदर्श और यथार्थ का गंगा-यामुनी संगम है। कथा का रूप घटनाओं और चरित्रों के माध्‍यम से निरूपित होता है। कथाकार के रूप में प्रेमचंद अपने जीवनकाल में ही किंवदंती बन गए थे। उन्‍होंने मुख्‍यत ग्रामीण एवं नागरिक सामाजिक जीवन को कहानियों का विषय बनाया है। उनकी कथा यात्रा में क्रमिक विकास के लक्षण स्‍पष्‍ट हैं। यहां विकास वस्‍तु विचार अनुभव तथा शिल्‍प सभी स्‍तरों पर अनुभव किया जा सकता है। उनका मानवतावाद अमूर्त भावात्‍मक नहीं, अपितु उसका आधार एक प्रकार का सुसंगत यथार्थवाद है, जो भावुकतापूर्ण प्रस्‍थान का पूर्णक्रम, पाठकों के समक्ष रख सका है।

मानसरोवर भाग 8-0
मानसरोवर भाग 8
75.00

मानसरोवर भाग 8

Additional information

Author

Prem Chand

ISBN

8128802399

Pages

232

Format

Paperback

Language

Hindi

Publisher

Diamond Books

ISBN 10

8128802399