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21 Dalit Kahaniyan (21 दलित कहानियां) Munshi Premchand book in Hindi-0
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21 Dalit Kahaniyan (21 दलित कहानियां) Munshi Premchand book in Hindi-0

21 Dalit Kahaniyan (21 दलित कहानियां) Munshi Premchand book in Hindi-In Paperback

Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹249.00.

किताब के बारे में

21 दलित कहानियां -: ‘प्रेमचंद की 21 दलित कहानियाँ’ भारतीय साहित्य के उस महत्त्वपूर्ण खंड को उजागर करती हैं, जहाँ महान कथाकार प्रेमचंद ने पहली बार परानुभूति की शक्ति से समाज के सबसे वंचित और शोषित वर्ग के जीवन को केंद्र में रखा। यह संकलन उस समय की गवाही देता है जब दलित-विमर्श एक संगठित आंदोलन नहीं था, लेकिन प्रेमचंद ने स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी के मानवतावादी विचारों से प्रेरित होकर, सामाजिक न्याय के प्रश्न को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा।यह संग्रह केवल 21 कहानियों का संकलन नहीं, बल्कि जातिगत क्रूरता, दमन और अछूतों के मानवीय गौरव की गाथा है। उनकी आरंभिक कहानी ‘दोनों तरफ से’ से लेकर ‘सद्गति’, ‘ठाकुर का कुआँ’ और ‘कफन’ तक। कहानियाँ उस समाज की निर्मम तस्वीर पेश करती हैं जहाँ धर्म और पाखंड ने मनुष्य को मनुष्य से अलग कर दिया था। प्रेमचंद ने इन कहानियों के माध्यम से पुरोहितवाद और सामाजिक पाखंड पर तीखा प्रहार किया और यह स्थापित किया कि ऊँच-नीच के भेद मिटाए बिना ‘स्वराज्य’ असंभव है।हालांकि वर्तमान दलित-विमर्श ‘स्वानुभूति’ को लेखन की एकमात्र कसौटी मानता है, प्रेमचंद का यह संग्रह दर्शाता है कि गहन ‘परानुभूति’ भी दलित जीवन की त्रासदी और उनके आत्मसम्मान को कितनी यथार्थता और संवेदनशीलता के साथ चित्रित कर सकती है। यह पुस्तक प्रेमचंद के लेखन में दलित-चेतना की निरंतरता को समझने और साहित्य में मानवीय मूल्यों की श्रेष्ठता पर विचार करने के लिए अनिवार्य है।

लेखक के बारे में

धनपत राय श्रीवास्तव (31 जुलाई 1880 – 8 अक्टूबर 1936) जो प्रेमचंद नाम से जाने जाते हैं, वो हिन्दी और उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार एवं विचारक थे। उन्होंने सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान आदि लगभग डेढ़ दर्जन उपन्यास तथा कफन, पूस की रात, पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, बूढ़ी काकी, दो बैलों की कथा आदि तीन सौ से अधिक कहानियाँ लिखीं। उनमें से अधिकांश हिन्दी तथा उर्दू दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुईं। उन्होंने अपने दौर की सभी प्रमुख उर्दू और हिन्दी पत्रिकाओं जमाना, सरस्वती, माधुरी, मर्यादा, चाँद, सुधा आदि में लिखा। उन्होंने हिन्दी समाचार पत्र जागरण तथा साहित्यिक पत्रिका हंस का संपादन और प्रकाशन भी किया। इसके लिए उन्होंने सरस्वती प्रेस खरीदा जो बाद में घाटे में रहा और बन्द करना पड़ा। प्रेमचंद फिल्मों की पटकथा लिखने मुंबई आए और लगभग तीन वर्ष तक रहे। जीवन के अंतिम दिनों तक वे साहित्य सृजन में लगे रहे। महाजनी सभ्यता उनका अंतिम निबन्ध, साहित्य का उद्देश्य अन्तिम व्याख्यान, कफन अन्तिम कहानी, गोदान अन्तिम पूर्ण उपन्यास तथा मंगलसूत्र अन्तिम अपूर्ण उपन्यास माना जाता है।

21 दलित कहानियां पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?

यह पुस्तक प्रेमचंद द्वारा लिखित दलित जीवन, शोषण, जातिगत अत्याचार और मानवीय गरिमा पर आधारित 21 कहानियों का संकलन है।

21 दलित कहानियां इस संग्रह में दलित-विमर्श को कैसे प्रस्तुत किया गया है?

संग्रह में दलित जीवन की पीड़ा, संघर्ष और सामाजिक भेदभाव को गहरी परानुभूति और संवेदनशीलता के साथ दिखाया गया है।

21 दलित कहानियां संग्रह में कौन-कौन सी प्रसिद्ध कहानियाँ शामिल हैं?

दोनों तरफ से’, ‘सद्गति’, ‘ठाकुर का कुआँ’, और ‘कफ़न’ जैसी प्रसिद्ध कहानियाँ इसमें शामिल हैं।

यह पुस्तक सामाजिक न्याय के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है?

क्योंकि यह जातिगत अन्याय और दमन को उजागर करती है तथा सामाजिक समानता की आवश्यकता पर जोर देती है।

प्रेमचंद समाज में ऊँच-नीच के भेद के बारे में क्या संदेश देते हैं?

वे कहते हैं कि ऊँच-नीच के भेद समाप्त किए बिना वास्तविक ‘स्वराज्य’ संभव नहीं है।

Additional information

Weight 0.225 g
Dimensions 21.59 × 13.97 × 1.5 cm
Author

Munshi Premchand

Language

Hindi

Format

Paperback

Pages

224

Publisher

Diamond Books

Additional information

Weight 0.225 g
Dimensions 21.59 × 13.97 × 1.5 cm
Author

Munshi Premchand

Language

Hindi

Format

Paperback

Pages

224

Publisher

Diamond Books

Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹249.00.

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ISBN10 -: 937476699X

SKU 9789374766996 Categories , Tags ,

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