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Mazhab Hi To Sikhata Hai Aapas Me Bair Rakhna (मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना)-0
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Mazhab Hi To Sikhata Hai Aapas Me Bair Rakhna (मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना)-In Paperback

Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹199.00.

किताब के बारे में

मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना -: मज़हब व्यक्ति के मानस को विकृत करता है। संसार में जितना रक्तपात मजहब को लेकर हुआ है, उतना किसी अन्य बिन्दु पर नहीं हुआ। 300 वर्ष तक चलने वाला क्रूसेड युद्धों का क्रम और उसके पश्चात अनेक देशों का इस्लामीकरण किया जाना या ईसाईकरण किया जाना हमारी इस बात की पुष्टि करता है। यहां तक कि भारत का विभाजन भी 1947 में मजहब के आधार पर ही हुआ था।आज भी विश्व के अनेक देश इस्लामिक आतंकवाद से जूझ रहे हैं। यहूदियों के एकमात्र देश इजराइल को केवल इसलिए मिटाने का प्रयास किया जा रहा है कि वह यहूदी देश है। इसी प्रकार अनेक शक्तियों की दृष्टि में भारत भी अखरता है, जिसे वे हिंदू देश के रूप में देखती हैं। इस सत्य को भुलाकर भी लोग अक्सर कहते हैं कि ‘मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ जबकि तथ्य बता रहे हैं कि ‘मज़हब तो सिखाता है आपस में बैर रखना।’17 जुलाई 1966 को ग्राम महावड़ जनपद गौतम बुद्ध नगर में जन्मे डॉ राकेश कुमार आर्य का साहित्य इसी प्रकार के राष्ट्रवादी चिंतन को लेकर लिखा गया है। इस पुस्तक में भी विद्वान लेखक ने मजहब की इसी प्रकार की विभाजनकारी और रक्तपात से भरी सोच को उद्घाटित करने का प्रयास किया है, जिससे पुस्तक बहुत ही उपयोगी बन गई है।

लेखक के बारे में

श्री राकेश कुमार आर्य द्वारा अभी तक लगभग 4 दर्जन प्रकाशित – अप्रकाशित पुस्तकों का लेखन कार्य किया गया है। श्री आर्य का जन्म 17 जुलाई, 1967 को ग्राम महावड़ जनपद गौतम बुद्ध नगर उत्तर प्रदेश में एक आर्य समाजी और राष्ट्रवादी परिवार में हुआ । उनके पिता का नाम श्री राजेंद्र सिंह आर्य और माता का नाम श्रीमती सत्यवती आर्या था।विधि व्यवसायी होने के साथ-साथ श्री आर्य एक प्रखर वक्ता भी हैं, जो कि विभिन्न विश्वविद्यालयों/शैक्षणिक संस्थानों एवं सभा सम्मेलनों में भारतीय संस्कृति, इतिहास और धर्म से संबंधित विचार गोष्ठियों में भाग लेते रहे हैं। राजस्थान के राज्यपाल श्री कल्याण सिंह द्वारा उन्हें विशेष रूप से लेखन कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से केन्द्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा श्री आर्य को उनकी शोधपरक कृति भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास (6 खंडों में प्रकाशित) पर वर्ष 2017 के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। श्री आर्य द्वारा लिखी गई पुस्तकों में भारत का 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, स्वातंत्रयवीर सावरकर, भारतीय संविधान के कुछ आपत्तिजनक अनुच्छेद, विश्वगुरु के रूप में भारत, क्या यह वही देश है, गांधी और सावरकर, वैदिक धर्म में गौ माता, भारत की राजनीति और लोकतंत्र, बुलंद भारतः मोदी जी की नीतियां आदि पुस्तकें सम्मिलित हैं।

मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?

यह पुस्तक मज़हब के नाम पर होने वाले विभाजन, हिंसा और रक्तपात की ऐतिहासिक व वैचारिक समीक्षा करती है।

मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना इस पुस्तक में मज़हब को कैसे देखते हैं?

लेखक के अनुसार मज़हब व्यक्ति के मानस को विकृत करता है और समाज में बैर व संघर्ष को जन्म देता है।

इस पुस्तक में ऐतिहासिक उदाहरण क्यों दिए गए हैं?

ताकि यह प्रमाणित किया जा सके कि इतिहास में सबसे अधिक रक्तपात मज़हब के नाम पर ही हुआ है।

क्रूसेड युद्धों का उल्लेख क्यों किया गया है?

क्रूसेड युद्ध मज़हबी हिंसा और जबरन धर्मांतरण का बड़ा उदाहरण हैं, जो लेखक के तर्क को मजबूत करते हैं।

मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना इस पुस्तक की उपयोगिता क्या है?

यह पुस्तक मज़हबी कट्टरता के कारण उत्पन्न समस्याओं को समझने और उन पर विचार करने के लिए अत्यंत उपयोगी है।

Additional information

Weight0.125 g
Dimensions21.59 × 13.97 × 1 cm
Author

Dr. Rakesh Kumar Arya

Language

Hindi

Format

Paperback

Pages

144

Publisher

Diamond Books

Additional information

Weight0.125 g
Dimensions21.59 × 13.97 × 1 cm
Author

Dr. Rakesh Kumar Arya

Language

Hindi

Format

Paperback

Pages

144

Publisher

Diamond Books

Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹199.00.

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ISBN10-: 9374760428

SKU 9789374760420 Category Tags ,

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