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Desh Pukar Raha hai : Desh-Prem Ki Anuthi Gathayen (देश पुकार रहा है : देश-प्रेम की अनूठी गाथाएँ)-0
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Desh Pukar Raha hai : Desh-Prem Ki Anuthi Gathayen (देश पुकार रहा है : देश-प्रेम की अनूठी गाथाएँ)-In Paperback

Original price was: ₹350.00.Current price is: ₹349.00.

किताब के बारे में

देश पुकार रहा है : देश-प्रेम की अनूठी गाथाएँ -: ‘देश पुकार रहा है’ में देशप्रेम से छलछलाती गौरव गाथाएँ हैं। इनमें पहली बलिदान कथा है, ‘भारत माता की पुकार पर’। देशप्रेम की भावना से छलछलाती इस मर्मस्पर्शी गाथा में अपना सब कुछ छोड़कर देश की आजादी के लिए लड़ने वाले हीरेन दा हैं, जो गाँधी जी के सच्चे शिष्य हैं और सन् बयालीस के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में घर-घर अलख जगाने निकल पड़े हैं। और एक जोशीली बालिका वनमाला भी, जिसके रोएँ-रोएँ में अपने देश के लिए कुछ करने की तड़प है।मुझे विश्वास है कि ‘देश पुकार रहा है’ मैं देश के लिए तन-मन-धन कुरबान करने वाले सच्चे वीर और साहसी भारतीयों की ये गौरव गाथाएँ पाठकों के मन को बाँध लेंगी, और उनके अंदर भी देश के लिए कुछ करने की भावना पैदा होगी। वे इस पुस्तक को खुद तो पढ़ेंगे ही, अपने दोस्तों को भी जरूर पढ़वाना चाहेंगे।

लेखक के बारे में

प्रकाश मनु – सुप्रसिद्ध साहित्यकार, संपादक और बच्चों के प्रिय लेखक । मूल नाम : चंद्रप्रकाश विग ।जन्म : 12 मई, 1950 को शिकोहाबाद, उत्तर प्रदेश में।शिक्षा : आगरा कॉलेज, आगरा से भौतिक विज्ञान में एम.एस-सी. (1973)। फिर साहित्यिक रुझान के कारण जीवन का सारा ताना-बाना ही बदल गया। पूरा जीवन लिखने-पढ़ने के लिए समर्पित करने का निश्चय। लगभग ढाई दशकों तक बच्चों की लोकप्रिय पत्रिका ‘नंदन’ के संपादन से जुड़े रहे। अब स्वतंत्र लेखन प्रसिद्ध साहित्यकारों के संस्मरण, आत्मकथा तथा बाल साहित्य से जुड़ी कुछ बड़ी योजनाओं पर काम कर रहे हैं। मनु जी के ‘यह जो दिल्ली है’, ‘कथा सर्कस’ और ‘पापा के जाने के बाद’ उपन्यास बहुत चर्चित हुए। ‘अंकल को विश नहीं करोगे’, ‘अरुंधती उदास है’, ‘मिसेज मजूमदार’, ’21 श्रेष्ठ कहानियाँ’, ‘तुम याद आओगे लीलाराम’ और ‘प्रकाश मनु की लोकप्रिय कहानियाँ’ समेत कोई डेढ़ दर्जन संग्रह ‘एक और प्रार्थना’ और ‘छूटता हुआ घर’ कविता संकलन खासे सराहे गए। ‘मेरी आत्मकथा : रास्ते और पगडंडियाँ’, ‘मैं मनु’, ‘यादें घर-आँगन की’ तथा ‘मैं और मेरी जीवन कहानी’ में लेखक होने की रोमांचक कथा ।बाल साहित्य का पर्याय कहे जाने वाले प्रकाश मनु जी की बच्चों के लिए विभिन्न विधाओं की डेढ़ सौ से अधिक रुचिकर पुस्तकें हैं, जिन्हें बच्चे ही नहीं, बड़े भी ढूँढ़- ढूँढ़कर पढ़ते हैं। इनमें प्रमुख हैं- प्रकाश मनु की चुनिंदा बाल कहानियाँ, मेरे मन की बाल कहानियाँ, धमाल – पंपाल के जूते, एक स्कूल मोरों वाला, खुशी का जन्मदिन, मैं जीत गया पापा, मातुंगा जंगल की अचरज भरी कहानियाँ, मेरी प्रिय बाल कहानियाँ, बच्चों की 51 हास्य कथाएँ, गंगा दादी जिंदाबाद, किस्सा एक मोटी परी का, चश्मे वाले मास्टर जी (कहानियाँ), प्रकाश मनु के संपूर्ण बाल उपन्यास (दो खंड), गोलू भागा घर से, एक था ठुनदुनिया, चीनू का चिड़ियाघर, नन्ही गोगो के कारनामे, पुंपू और पुनपुन, नटखट कुप्पू के अजब-अनोखे कारनामे, खजाने वाली चिड़िया (उपन्यास), मेरी संपूर्ण बाल कविताएँ, प्रकाश मनु की 100 श्रेष्ठ बाल कविताएँ, बच्चों की एक सौ एक कविताएँ, मेरी प्रिय बाल कविताएँ, मेरे प्रिय शिशुगीत(कविताएँ), प्रकाश मनु के श्रेष्ठ बाल नाटक, मुनमुन का छुट्टी क्लब, बच्चों के अनोखे हास्य नाटक, बच्चों के रंग-रंगीले नाटक ( बाल नाटक ), विज्ञान फंतासी कथाएँ, अजब अनोखी विज्ञान कथाएँ, अद्भुत कहानियाँ ज्ञान-विज्ञान की (बाल विज्ञान साहित्य )।<BR>हिंदी में बाल साहित्य का पहला बृहत् इतिहास ‘हिंदी बाल साहित्य का इतिहास’ लिखा। इसके अलावा ‘हिंदी बाल कविता का इतिहास’, ‘हिंदी बाल साहित्य के शिखर व्यक्तित्व’, ‘हिंदी बाल साहित्य के निर्माता’ और ‘हिंदी बाल साहित्य : नई चुनौतियाँ और संभावनाएँ’ पुस्तकें भी हैं। कई पुस्तकों का पंजाबी, सिंधी, मराठी, गुजराती, कन्नड़ समेत अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद |<BR>पुरस्कार : बाल उपन्यास ‘एक था ठुनठुनिया’ पर साहित्य अकादेमी का पहला बाल साहित्य पुरस्कार। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के ‘बाल साहित्य भारती’ पुरस्कार और हिंदी अकादमी के ‘साहित्यकार सम्मान’ से सम्मानित । कविता-संग्रह ‘छूटता हुआ घर’ पर प्रथम गिरिजाकुमार माथुर स्मृति पुरस्कार | 

देश पुकार रहा है पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?

यह पुस्तक देशप्रेम, त्याग, साहस और सच्चे स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवपूर्ण गाथाओं पर आधारित है।

देश पुकार रहा है पुस्तक की पहली बलिदान कथा किस बारे में है?

पहली कथा ‘भारत माता की पुकार पर’ है, जिसमें हीरेन दा का वीरतापूर्ण त्याग और देशभक्ति दर्शाई गई है।

हीरेन दा कौन हैं

हीरेन दा एक स्वतंत्रता सेनानी और गांधीजी के सच्चे अनुयायी हैं, जिन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

देश पुकार रहा है पुस्तक पाठकों को कैसे प्रेरित करती है?

यह देशभक्ति से भरी कहानियों के माध्यम से पाठकों में देश के लिए योगदान देने की भावना जगाती है।

लेखक इस पुस्तक से क्या अपेक्षा रखते हैं?

लेखक चाहते हैं कि यह पुस्तक पाठकों के मन को छुए और उन्हें भी देश सेवा के लिए प्रेरित करे।

Additional information

Weight0.300 g
Dimensions21.59 × 13.97 × 2 cm
Author

Prakash Manu

Language

Hindi

Format

Paperback

Pages

320

Publisher

Diamond Books

Additional information

Weight0.300 g
Dimensions21.59 × 13.97 × 2 cm
Author

Prakash Manu

Language

Hindi

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Paperback

Pages

320

Publisher

Diamond Books

Original price was: ₹350.00.Current price is: ₹349.00.

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ISBN10-: 9371225998

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